पिछले 16 साल से अलग रह रहे कपल के तलाक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए पति की याचिका ठुकरा दी। शुक्रवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने पति को साफ-साफ निर्देश दिया कि वे चुपचाप बैठे रहें और हर महीने अपनी पत्नी को तयशुदा 15 हजार रुपये का गुजारा भत्ता देकर जिंदगी में खुशी-खुशी गुजारें। अदालत ने जोर देकर कहा कि दोनों में लंबे समय से अलगाव जारी है। इसके बावजूद, दोनों में सुलह की संभावना अभी भी बची हुई है। लिहाजा, शादी को इतनी आसानी से खत्म नहीं किया जा सकता।

16 साल से अलग-अलग रहे पति-पत्नी

पति (54 वर्षीय) के वकील ने बताया कि उनका मुवक्किल सरकारी नौकरी में हैं। उनकी सैलरी 65 हजार रुपये है। उनका कोई संतान नहीं है। पति ने कहा कि दोनों के स्वभाव मेल नहीं खाए, इसलिए पिछले 16 साल से दोनों अलग-अलग रह रहे हैं। पत्नी अपने मायके में मां के साथ रह रही है, जिससे दोनों के बीच आपसी तालमेल पूरी तरह खत्म हो चुका है। 

पति ने कहा कि वे पत्नी को हर महीने 15 हजार रुपये भरण-पोषण दे रहे हैं और अब चाहते हैं कि न सुधरने वाली इस शादी को खत्म घोषित कर दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस अर्जी पर पत्नी की राय पूछी। पत्नी ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह पति के साथ रहना चाहती है और उन्हें छोड़ना नहीं चाहती। 

पति के साथ रहना चाहती है पत्नी लेकिन।।।

पत्नी ने अदालत को यह भी बताया कि उसकी मांग केवल इतनी थी कि पति की जहां पर पोस्टिंग हो, वहां पर उसे साथ रखा जाए। लेकिन पति ने ऐसा नहीं किया, जिसके चलते उसे मजबूरी में वापस मायके जाकर मां के साथ रहना पड़ रहा है। पत्नी के इस बयान ने मामले की दिशा ही बदल दी। 

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने पति से सीधे कहा, 'अपनी पत्नी को अपने साथ रखो।' पति के वकील ने जब फिर से अलगाव की लंबी अवधि और दोनों का स्वभाव अलग होने का हवाला दिया, तो कोर्ट ने जवाब दिया कि सुलह का दरवाजा इतनी जल्दबाजी में बंद नहीं किया जा सकता। 

'शांति से बैठे रहो, 15 हजार देते रहो'

बेंच ने टिप्पणी की कि आज के समय में 15 हजार रुपये मासिक भत्ता काफी कम है। पति के वकील ने कहा कि उनका वेतन 65 हजार रुपये है और रिटायरमेंट के बाद कोई पेंशन भी नहीं मिलेगी। उनकी उम्र भी 54 साल हो चुकी है, ऐसे में राशि बढ़ाना संभव भी नहीं है। उसके तर्कों से सहमति जताते हुए कोर्ट ने मौजूदा व्यवस्था को जारी रखने का आदेश दिया।

इसके साथ ही सख्त हिदायत भी दी, 'ठीक है, आप इतने ही पैसे देते रहें।' जब पति की ओर से तलाक की मांग दोबारा उठाई गई, तो बेंच ने साफ इनकार करते हुए डपट दिया। उन्होंने कहा, 'शांति से बैठे रहो, 15 हजार रुपये देते रहो और खुश रहो।' अदालत का सख्त रुख देखते हुए पति ने आदेश के पालन पर रजामंदी जताई और कहा कि निर्देशों का पालन किया जाएगा।

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